फोटो- फरीदाबाद में महात्मा गांधी पार्क में उपवास करते कांग्रेसजन।
फरीदाबाद में कांग्रेसी नेताओं ने एक दिवसीय उपवास व विरोध कार्यक्रम आयोजित कर जताया अपना विरोध
देशपाल सौरोत/ ब्यूरो रिपोर्ट
फरीदाबाद, 11 जनवरी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कानून में बदलाव के प्रयासों के विरोध में रविवार को जिले के कांग्रेसी नेताओं ने एन.एच.-5 स्थित महात्मा गांधी पार्क में एक दिवसीय उपवास एवं प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान मनरेगा को कमजोर किए जाने के प्रयासों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की गई और मजदूर-किसानों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया गया।
ये रहे मुख्यरूप से मौजूद
इस मौके पर पृथला के विधायक रघुबीर सिंह तेवतिया, पूर्व विधायक नीरज शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलजीत कौशिक, बडखल के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी विजय प्रताप सिंह, फरीदाबाद के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी लखन कुमाार सिंगला, बल्लभगढ़ की पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी पराग शर्मा, महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुधा भारद्वाज, कांग्रेस सेवादल प्रदेशाध्यक्ष डॉ. पूनम चौहान, महिला सेवादल प्रदेशाध्यक्ष सुनीता शर्मा, अब्दुल गफ्फार कुरैशी, डा. एस.एल. शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता सुमित गौड़, योगेश ढींगड़ा, नितिन सिंगला, गिरीश भारद्वाज, प्रियंका भारद्वाज, जगन डागर, विनोद कौशिक, संजय सोलंकी, विकास दायमा, हरीश तंवर, खुशबू खान, रचना भसीन, संजय त्यागी, एस.एस. गौड़, नसीमा खान, विशाल पाण्डे, हरजीत सिंह, हेमलता शर्मा, अजीत तोमर, राजेंद्र चपराना, अनिल शर्मा, सुंदर माहौर, गुलाब सिंह, ईशांत कथूरिया, बलजीत सिंह, ओमप्रकाश चौधरी, हरीलाल गुप्ता, भूषण कुमार, बाबूलाल रवि, अशोक रावल, गजना लाम्बा, सुनीता फागना, सविता चौधरी जिलाध्यक्ष पलवल महिला कांगे्रेस, जयबीर बैंसला, देवदत्त, सूरज ढेडा इत्यादि अनेकों कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे।
मनरेगा को कमजोर कर भाजपा सरकार गरीब मजबूरों के हकों पर कर रही कुठाराघात: रघुबीर तेवतिया
इस मौके पर पृथला के विधायक रघुबीर तेवतिया ने कहा कि यूपीए सरकार के समय, जब देश के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह थे, तब मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना लागू की गई थी। इस योजना ने ग्रामीण गरीबों को 100 दिन के सुनिश्चित रोजगार की गारंटी दी और करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोविड महामारी और आपदा के कठिन समय में भी मनरेगा गरीबों और मजदूरों के लिए सबसे बड़ा सहारा साबित हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार ने मनरेगा को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया है। पहले जहां गांवों में काम मांगने पर रोजगार मिलता था, अब स्थिति यह है कि राज्य सरकारों को केंद्र के पास प्रस्ताव भेजने पड़ते हैं और उसके बाद भी काम मिलेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती। भुगतान में देरी और बजट में कटौती से मजदूरों का भरोसा तोड़ा जा रहा है। उन्होंने मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मनरेगा कमजोर हुई तो इसका सीधा असर ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और महिलाओं पर पड़ेगा, जिसे कांग्रेस कभी स्वीकार नहीं करेगी।
मजदूरों के काम करने के संवैधानिक अधिकार को छीन रही है भाजपा सरकार: पूनम चौहान
वहीं कांग्रेस सेवादल की प्रदेशाध्यक्ष पूनम चौहान व सेवादल जिलाध्यक्ष सुनीता शर्मा व कांग्रेसजनों ने संयुक्त रुप से कहा कि नए नियम में भाजपा मजदूरों के काम करने के संवैधानिक अधिकार को छीन रही है। जबकि कांग्रेस हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी। हर गांव में काम की कानूनी गारंटी दी जाती थी। भाजपा के नए प्रावधान में अब पंचायत के पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी। काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि पुराने नियम में पूरे साल काम की मांग कर सकते थे। कानूनी न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी गई थी, जब नए नियम में फसल कटाई के मौसम में काम नहीं मिलेगा। मोदी सरकार मजदूरी अपनी मर्जी से मनमाने ढंग से तय करेगी। पुराने नियम में पंचायत के माध्यम से अपने ही गांव के विकास के लिए काम मिलता था। काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायकों का सहयोग मिलता था। नए नियम के अनुसार अब आप कहां और क्या काम करेगें, यह मोदी सरकार अपने पसंदीदा ठेकेदारों के माध्यम से मनमाने ढंग से तय करेगी। अब किसी मेट या रोजगार सहायक का सहयोग नहीं मिलेगा। पुराने नियम में मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केन्द्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के काम उपलब्ध कराती थी। नए नियम में अब राज्य सरकारों को मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद देना होगा, खर्च बचाने के लिए हो सकता है, वो काम ही उपलब्ध न कराएं। कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार के इस तानाशाही फैसले का जमकर विरोध करती है और जब तक सरकार यह फैसला वापिस नहीं लेती, जब तक सडक से लेकर संसद तक कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।
